कहीं ना जाती ये यादें हैं March 30, 2022 बाहरी चीज़ों की सफाई में पता ही नहीं चला कब मन पे यादों की छाप और गहरी हो गई | भुलाने की कोशिश में इतना याद कर लिया की अब भुलाने की लालसा ही नहीं रही | बंद हो गया है अब फर्क पड़ना क्यूँकि अब तर्क देने की इच्छा ही खो गई | Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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